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ऋग्वेद संहिता

ऋग्वेद   विश्व   साहित्य   का   प्राचीनतम   ग्रन्थ   है   ।   यह   विभिन्न   देवताओं   के   स्तुतिपरक   मन्त्रों   का   संकलन   है   और   इसकी   उत्पत्ति   विराट   पुरूष   के   मुख   से   मानी   गई है   ।   जिसके   द्वारा   देवता   की   स्तुति   अथवा   अर्चना   की   जाए  ,  उसे   ऋक्   कहते   हैं  -  ‘ ऋच्यते   स्तूयते   यया   इति   ऋक् ’  और   ऐसी   ऋचाओं   के   संग्रह   का   नाम   ही ऋग्वेद   है   ।इसके   पुरोहित  ‘ होता ’  है  ,  जो   कि   देवताओं   का   आह्वान   करता   था   । ऋग्वेद   में  ‘ ज्ञान ’  की   महत्ता   का   प्रतिपादन   किया   गया   है   ।   ऐसा   माना   जाता   है ...

अथर्ववेद संहिता

अथर्ववेद   का   अर्थ   है  -  अथर्वों   का   वेद   या   अभिचार   मन्त्रों   का   ज्ञान   अथर्वन्   ऋषि   के   नाम   पर   इस   वेद   का   नाम   अथर्ववेद   पड़ा   ।   इसे   भृग्वंगिरा   वेद  ,  अथर्वांगिरोवेद  ,  भिषग्वेद  ,  क्षत्रवेद   तथा   ब्रह्मवेद   के   नाम   से   भी   जाना   जाता   है   ।इसका ऋत्विक ब्रह्मा है । इस वेद के देवता सोम तथा आचार्य सुमन्तु हैं ।अथर्ववेद को वेदत्रयी ( ऋक् , यजुर्वेद , सामवेद ) की अपेक्षा कम महत्व दिया गया है क्योंकि इसमें अधिकांशतः अभिचारात्मक सूक्त नहीं हैं । अथर्ववेद की नौ शाखाएँ हैं - पिप्पलाद् स्तोद मोद शौनकीय जाजल जलद ब्रह्मवेद देवदर्श चारणवैद्य   । इनमें   से   सम्प्रति   पिप्पलाद   और   शौनकीय   यो   दो   शाखाएँ   ही   प्राप्त   होती   हैं   ।   इसमें   २० ...